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मैं सोचती हूँ
मैं सोचती हूँ
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© Archana Pandey

Inspirational

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मैं सोचती हूँ 

कल को अगर

बड़ी गाड़ी हो गयी

बड़ा घर हो गया

तो कहीं उन आंखों से 

रिश्ता टूट न जाए

जो सड़क के किनारे 

अपना दर्द हाथों में 

लिए बेचते हैं

जो क़दम उनके 

क़रीब से गुज़रते थे 

उन्हें महसूस करते हुए

तो कभी-कभी दर्द 

ख़रीदते हुए

कहीं वो निरीह न हो जाएं

ऐसा नहीं मुझे ख़ुद पर

भरोसा नहीं है

मगर मैं डरती हूं

कहीं हवाओं की तेज़ रफ़्तार में 

वक़्त ठहरने का

मौक़ा ही न दे।

दर्द सड़क

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