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तू सचमुच आई है या तेरे आने का एहसास है
तू सचमुच आई है या तेरे आने का एहसास है
★★★★★

© Dinesh Gupta

Romance

1 Minutes   6.7K    1


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खिल उठी है कलियाँ सारी, चहक रहा आँगन-आँगन
बहकी हुई है सारी फिज़ायें, महक रहा गुलशन-गुलशन
रोम-रोम मदहोश हुआ, नाच रही धड़कन-धड़कन
मौसम नया, रुत नयी, हवाओं में बात कुछ खास है
तू सचमुच आई है, या तेरे आने का अहसास है….

बदला हुआ है सारा आलम, बदले हुए हैं सारे नज़ारे
होंठ मगर ख़ामोश हैं लेकिन, निगाहें कर रही है इशारे
पुलकित हो गया सारा अंतर्मन, मन कोमल शीतल पावन है
बहके हुए हैं कदम हमारे, तेरी हर एक अदा मन लुभावन है
सचमुच बरसेगा ये बादल आज, या घटाओं का कोई नया अंदाज़ है
तू सचमुच आई है या तेरे आने का अहसास है….

कितना हसीं है लम्हा-लम्हा, कितना सुन्दर पल-पल है
ऊपर-ऊपर ख़ामोशी है, भीतर-भीतर हलचल है
आनंदित है सारा तन-बदन, मन भँवरा पागल है
क्या बरसेगा आज हम पर तेरी चाहत का बादल है
बिखरे हुए हैं सुर सारे मगर, सज रहा फिर भी कोई साज है
तू सचमुच आई है या तेरे आने का अहसास है |

 

प्यार रोमांस मुहब्बत कविता

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