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हाय के तेरी वाह वाह पर अब मुझे रोना आया...
हाय के तेरी वाह वाह पर अब मुझे रोना आया...
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© Sudhir Kumar Pal

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हाय! के तेरी वाह वाह पर अब मुझे रोना आया,

थमती पुकार-ए-दिल पर अब मुझे रोना आया...

क्युँ ना होश-ए-इख्तियारी थामा वक़्त का आँचल,

गुज़री जो शाम-ए-बज़्म के अब मुझे रोना आया...

असद का ना था लिहाज़ के उम्र अब ढीली पड़ी,

नही ताक़त-ए-बेदाद-ए-इंतज़ार तो अब मुझे रोना आया...

बज़्म-ए-ख़याल सजाते चले तमाशे कई बहार के,

हुई मुश्त-ए-ख़ाक सुबह-ए-बहार पर मुझे रोना आया...

हसरत-ए-अफ़सून-ए-इंतज़ार-ए-यार दिल-ओ-दीद रखे जाम,

हसरत-ए-अफ़सून-ए-इश्क़-ए-रब 'हम्द' मुझे रोना आया...

असद हसरत रब 'हम्द'

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