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शब्द है अधूरे माँ
शब्द है अधूरे माँ
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© Rishi Jaiswal

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शब्द हैं अधूरे माँ
तुक नहीं कविता में आज
चाहे अलंकार कोई 
या कोई छन्दों का ताल
व्यर्थ है ये सारे साज़

आँख में काजल लगी है
तेरे उन हाथों का
याद आ रही है माँ
सारी उन बातों की
डाँट में भी था छुपा
तेरा वो प्यार माँ
भीगने से बारिशों में
तेरा वो इंकार माँ

बारिशें यहाँ भी हैं
भीग रहा आज मैं
पर यहाँ नहीं कोई 
डांटने वाला है आज
शब्द हैं अधूरे माँ
तुक नहीं कविता में आज

हाथ नहीं धुलने तो
भूख नहीं आज है
ये तो सब बहाने हैं
प्यार भरे हाथों से
रोटियाँ जो खाना है
मेरे लबों पे जो भी गीत
सब तेरे तराने हैं
तुझसे क्या छिपा है माँ
पढ़ लेती तू सारे राज़ 
शब्द हैं अधूरे माँ
तुक नहीं कविता में आज

चोट लग गयी है माँ
आज नज़र उतार दे
माटी के प्याले में
काजल फिर पार दे
खा के रोटियाँ जो मैं
भागने लगूँ जो आज
दौड़ के पकड़ लेना
लोरियाँ सूना के आज
शब्द है अधूरे माँ
तुक नहीं कविता में आज

mother माँ love

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