Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
कशमकश
कशमकश
★★★★★

© Rashi Singh

Others

1 Minutes   1.1K    4


Content Ranking

एक अजीब कशमकश है
दिन गुजर रहा हैं यूं
जैसे हाथ से छूटती रेत
सिहर उठता है ह्रदय 

देख बेबस मायूस पात्र
बेबस सांसों की रागिनी
न जीवन में कोई हलचल है 
बैरागी मन मेरा 

रेत के महल में शांति तलाशता
दूर तक मरीचिका है
फैली अशांति मन में  
यौवन है ढलान पर


कुछ ही तो बसन्त देखे है
ज़िन्दगी में  हर तरफ
फैला झूठ का धुँआ  
सांस लेना दुस्वार है  


भटकता है मन
संसार के पथरीले रास्तो पर
अजीब कशमकश है  
हर खुशी खामोश है...

मन कश्मकश संसार

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..