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બિખર ગયા હું
બિખર ગયા હું
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© Deepak Solanki

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बिखर गया हु में पत्तों की तरह
जब पेड़ का सहारा था तब मैं दुनिया को देखता
पड़ा हूं मैं अब कचरे के ढेरमें
 
किसी का साथ छूट जाता है
तब ऐसा लगता है कि दुनिया को छोड़ दिया
 
परेशान इंसान बिखरे पत्तो की तरह है
साथ छोड़ दिया तो दुनिया भी छोड़ देता हे
मैं भी एक दिन बड़ा इंसान बनूंगा
ऐसा कहने से लोग जलते हैं
 
क्योकि लोग माचिस की तरह है
किसी का आगे बढ़ना देखा नहीं जाता
और ईश्वर की कदर करना सीखो
आपको भी कदरदान बना देगा
 
पैसे तो हाथ का मेल है यह कहकर घर में पैसो का ढेर करते हैं
मरने के बाद क्या लेकर जाओगे
सिर्फ लेकर जाओगे
तुम्हारा द्वेष
तुम्हारा घमंड
तुम्हारी ईर्ष्या
तब क्या करोगे
 
ऐसा लगता है कि दुनिया लोगों से नहीं माचिस से भरी हुई है
मैं भी अपनी औकात से मांगता हूं
और वह मुझे बढ़ कर देता है
पता है सफलता क्या है
 
औकात में मांगो और ज्यादा मिले
उसे सफलता कहते हैं
मुझे भी नाज़ है ईश्वर पर
की कैसे लोग बनाए हैं
अच्छा करने जाओ तो भी बुराई
 
सच बोलो तो भी बुराई
इंसान भी अपनी इंसानियत भूल गया है
कभी दूसरों के बारे में कभी सोचा है
अपनी आज़ादी में दूसरों को कोई परेशान मत करो
गरीब अमीर की कोई व्याख्या है
सब इंसान ही है
 
तो क्यों बुराई करते हो
ईश्वर अब क्या करें
और
तुम भी क्या कर सकते हो
कैसा देश बनाया है पत्थर में इश्वर को ढूंढते हैं
तुझे पैदा करने वाले माबाप को भूल गए
 
क्या करें मां बाप की बारी आती है तब गरीब हो जाते हैं
इस माबाप को मत भूलो
सिर्फ पैर छूने से बड़े-बड़े पाप धुल जाते हैं
"रहीश" किसीका साथ मत छोड़ना
 
क्योकि दुनिया भी छोड़नी पड़ती है
बिखर गया हूं मैं पत्तों की तरह
पेड़ का सहारा था
तब मैं दुनिया को देखता था
 
 
 
 

હિન્દી કવિતા

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