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मृत्यु गीत :: 
अघोरी ! चिता तनिक जल जाने दे
मृत्यु गीत :: अघोरी ! चिता तनिक जल जाने दे
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© Anupam Tripathi

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अघोरी ! चिता तनिक जल जाने दे


अभी दिवस का पहर शेष है
राग – द्वेष मन, भरा क्लेश है
उर के अन्ध विवर में अब भी
सुलग रही भीषण कामाग्नि
मेरे अन्तर का दावानल ढल जाने दे ।
अघोरी ! चिता तनिक जल जाने दे ।।


मोहपाश में बंधा हुआ मन
काम-पिपासा में जकड़ा तन
अग्निशिखा का पा आलिंगन
शायद तप बन जाए कुन्दन
बूंद -बूंद गल रहा दर्प ये ; गल जाने दे ।
अघोरी ! चिता तनिक जल जाने दे ।।


कौन है अपना? कौन पराया??
ब्रह्म - बोध ये किसने पाया
उत्सव बना आदमी जब भी
निज-मंथन वो कब कर पाया
छलता है धृतराष्ट्र ; जो छल का, छल जाने दे।
अघोरी ! चिता तनिक जल जाने दे ।।


रिश्ते - नाते खूब निभाये
गीत खुशी के जीभर गाए
भूल गया मैं चकाचौंध में
हद से बढ़ते अपने साए
लील रहे अस्तित्व; जो पल वो, टल जाने दे।
अघोरी ! चिता तनिक जल जाने दे ।।


जीवन : एक अबूझ पहेली
सुख-दु:ख इसकी सखी-सहेली
दु:ख; धीरज की अग्निपरीक्षा
सुख : बालू से भरी हथेली
व्यर्थ गणित ; क्या खोया-पाया, चल जाने दे।
अघोरी ! चिता तनिक जल जाने दे ।।


भस्म पे माना हक है तेरा
जग ये सारा रैन – बसेरा
जीवन-पथ पे चिता है डेरा
जाने कब फिर लगेगा फेरा
शिकन यथावत् ; विकट भाल के, बल जाने दे।
अघोरी ! चिता तनिक जल जाने दे ।।


कल जब फिर सारे आयेंगे
फूल-अस्थियाँचुन जायेंगे
साथ गईं तो होंगी : यादें
और उन्हें हम अपना क्या दें?
शेष नहीं ; अब सफर खत्म पर, कल जाने दे ।
अघोरी ! चिता तनिक जल जाने दे ।।


मृत्यु -गीत अंतिम हस्ताक्षर
सीख सका न ढाई आखर” (प्रेम)
जर्जर काया—- मन अकुलाया
पीड़ा का बाजार सजाया
कडीधूप; मैं लिए पींठ पर , “जलआने दे ।
अघोरी ! चिता तनिक जल जाने दे ।।

 

मैं ; माटी का फूल, नया जीवन पाऊँगा
भस्मीभूत हो; वातायन पर, छा जाऊँगा
एक नया संकल्प; लिए मैं, नई रौशनी
शंखनाद नव-युग का करते, फिर आऊँगा
कटु सत्य है; बहुत खलेगा, खल जाने दे।
अघोरी ! चिता तनिक जल जाने दे।।

                                                      

aghori anupam tripathi poem

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