Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
प्रतीक
प्रतीक
★★★★★

© Rahul Dev

Others

1 Minutes   6.8K    2


Content Ranking

वह चलती

गिरती

उठती

हाँफती

किसी पेड़ का लेकर सहारा

ठहरती,

रुक जाती

पूछने पर बताती-

मैं जनशक्ति हूँ

इन दिनों क्षीण हो

विश्राम चाहती हूँ

अपने आसपास फैली हुई गंदगी को देखकर

मैं बहुत ऊब गयी हूँ

मैं अगर एक हो जाऊँ तो क्या से क्या कर दूँ

लेकिन नहीं, आज मेरी परिभाषा उलट गयी है 

शक्ति होकर भी

अब मैं

दुर्बलता का प्रतीक बन गयी हूँ

मुझे तुम्हारा सहारा चाहिऐ ...

इतना कहकर उसने पीछे मुड़कर देखा

कि वह उसे छोड़कर चल दिया है !

प्रतीक

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..