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© Usha Rani

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खरा वही जो स्वंय

करे मूल्याँकन।

इनका उनका नही अपना

झाँकें आँगन।

पत्थर रगड़ कर खोजी

आग तुमने।

जल-जल कर जीवन

गुर रहे अपने ।

इन्सान तो मिल जाते हैं

बिना कपड़ो वाले।

कपड़ो में इन्सान को

न बसते देखा है।

अपने ही कर देते हैं

जफ़ा कई बार।

लगाव बता कर घाव

करते बार-बार।

उम्र भर की सीख धरी

रह जाती है।

जब पैरों तले ज़मीन

खिसक जाती है।

पहेली है जीवन इसे

सुलझा लो।

कुछ दर्द मिटाने का दस्तूर

निभा लो।

#poetry #hindipoetry

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