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हां नारी हूँ
हां नारी हूँ
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© Ankita kulshrestha

Inspirational

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"मैं चपला सी तेज युक्त

नभ तक धाक जमाऊँ

आ सूरज, तेरी किरणों से

अपना भाल सजाऊँ

कभी धरा- गांभीर्य ओढ़कर

मौन का काव्य सुनाऊँ

तितली से लेकर चंचलता 

फूलों से रंग चुराऊँ

सरिता सी कल-कल बहती

बाधा से रुक ना पाऊँ

मैं स्वयं भोर की उजली

दुःख तम से क्या घबराऊँ

हाँ नारी हूँ , मैं कोमल मन

पर अबला नहीं कहाऊँ....""

तितली फूल किरण

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