Yogesh Suhagwati Goyal

Drama


5.0  

Yogesh Suhagwati Goyal

Drama


वाह रे आदमी

वाह रे आदमी

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जब पैसा नहीं होता, सब्जियां घर पर खाता है

जब पैसा होता है, वही सब्जियां अच्छे रेस्टोरेंट में खाता है।


जब पैसा नहीं होता, साइकिल की सवारी करता है

जब पैसा होता है, साइकिल पर कसरत करता है।


जब पैसा नहीं होता, खाना कमाने के लिए चलता है

जब पैसा होता है, चर्बी जलाने के लिए चलता है।


वाह रे आदमी,

खुद को धोखा देने में कभी विफल नहीं होता।


जब पैसा नहीं होता, शादी करना चाहता है

जब पैसा होता है, तलाक लेना चाहता है।


जब पैसा नहीं होता, पत्नी सचिव बन जाती है

जब पैसा होता है, सचिव पत्नी बन जाती है।


जब पैसा नहीं होता, अमीरी का नाटक करता है

जब पैसा होता है, गरीबी का नाटक करता है।


वाह रे आदमी,

सच्चाई कभी नहीं बता सकता।


कहता है शेयर बाजार खराब है, मगर सट्टा लगाता है

कहता है कि पैसा बुरा है, मगर जमा करता है।


कहता है उच्च पदों पर अकेलापन है, मगर उन्हें चाहता है

कहता है जुआ और शराब बुरा है, मगर लिप्त रहता है।


वाह रे आदमी,

जो कहता है करता नहीं और जो करता है कहता नहीं। 


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