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बाराती
बाराती
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© Sanjay Verma

Fantasy

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पहाड़ो पर टेसूरंग बिखेर जाते

लगता पहाड़ ने

बांध रखा हो सेहरा


घर के आँगन में

टेसू का मन नहीं लगता

उसे सदैव सुहाती

पहाड़ की आबों हवा|


मेहंदी की बागड़ से

आती महक

लगता कोई

रचा रहा हो मेहंदी


पीली सरसों की बग़िया

लगती ऐसे जैसे शादी के लिए

बगिया के हाथ कर दिए हो पीले


भोरें -कोयल गाते स्वागत गीत

यूँ दीखता जैसे प्रकृति भी रचाती विवाह


उगते फूल आमों पर आती बहारें

आमों की घनी छाँव तले

पशु- पक्षी बना लेते

शादी का पांडाल

ये ही तो है असल में

प्रकृति के बाराती


नदियां कल -कल कर

उन्हें लोक गीत सुनाती

एक तरफ पगडंडियों से

निकल रही इंसानों की बारात


सूरज मुस्काया

धरती के कानों में धीमे से कहा-

लो आ गई एक और बारात

आमों के वृक्ष तले

फाल्गुन में


पहाड़ टेसू फाल्गुन

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