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ख़ुशी अपने भीतर है
ख़ुशी अपने भीतर है
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© Yogesh Suhagwati Goyal

Drama Inspirational

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दूर क्यों तलाश उसकी, जो बिलकुल पास है,

ख़ुशी तेरे पास खड़ी है, फिर भी तू निराश है ।


भविष्य की चिंता और, वर्तमान की चाहतों में,

पल पल की ख़ुशी, लुट गई और लुट रही है ।

अपने भीतर झाँक, मिलना कितना सरल है,

अपनी नासमझी से, बना रहा इसे जटिल है ।


कभी महक, कभी ध्वनि, बनकर गुजरती है,

कभी स्पर्श बनके, तन मन विभोर करती है ।

कांपती सर्दी में धूप का, टुकड़ा बन जाती है,

तपती गर्मी में बादलों से, फुहारें बरसाती है ।


कभी चिड़ियों के, कलरव में सुनाई देती है,

कभी बच्चे की, किलकारी में नज़र आती है ।

कभी चंद पलों की, गहरी नींद बन जाती है,

ख़ुशी एहसास है, जो रूप बदलकर आती है ।


कभी रास्ते पर, चलते-चलते मिल जाती है,

मगर हर पल हमारे, आसपास मंडराती है ।

ख़ुशी को हर पल, पहचानना आना चाहिये,

बस ख़ुशी से मुलाकात, करना आना चाहिये ।

Poem Life Happiness Soul

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