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व्यंग्य --- सीढियाँ बनते साँप
व्यंग्य --- सीढियाँ बनते साँप
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© Anupam Tripathi

Comedy

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व्यंग्य ------- सीढियाँ बनते साँप 

हैरत होती है कि ; ------साँप ! आखिर क्यों मौन हैं ?

निवेदन --- साँप - सीढ़ी ( मोक्षपट ) का आविष्कार 13वीं सदी में भारतीय संत ज्ञानदेव ने किया था।उन्हें प्रणाम...........

जैसा कि; आप जानते ही हैं ---------
साँप और सीढी का खेल सनातन है
: आदम सभ्यता के समानान्तर 
यह परवान चढ़ा है.
यूं भी कहा जा सकता है कि;
आदिम ------- बर्बरता ने इसे 
बे--रहमी से गढ़ा है.

----- "विकास कभी व्यक्तिपरक नहीं होता 
यह सामूहिक अवधारणा का नाम है "
व्यक्तियों ने विकास को ढोया है -------
यह सरासर बेतुका बयान है.

आप ! --------------- 
इतिहास उठाकर देखिए -------- 
निरपेक्ष नजरिए से सोचिए
मानव : विकास के लिए ; 
सीढियाँ बुनता रहा
सफलता के सोपान चढता रहा
हर सीढी के मुहाने पर ; साँप रोपता रहा.

साँप ! 
जिनका अनिश्चित होता है ; नाप
जिन्हें ; नहीं पाते आप भाँप
अचानक ; फ़न फैलाए 
आपकी राह में खड़े होते हैं 
अमूमन ; आपकी सफलता से बड़े होते हैं. .

--------------- आप इन्हें कुचल नहीं पाते
--------------- भागना भी ये असंभव बनाते
क्योंकि ;आपकी सफलता के सूत्रधार ------------अकेले आप हैं 

लेकिन ; आपके पराभव के अनेकों -------------- गवाह हैं .
आप अपनी ही चुनी सीढी की बगल में 
औंधे मुँह "ध-ड़ा-म " से गिरे पडे होते हैं 
लोग प्रसन्नमुख तालियाँ पीट रहे होते हैं . . 
बेशक !
"शह और मात " के इस खेल में 
साँप और सीढियों के मध्य 
एक परिचित समन्वय होता है ,
सीढियाँ : साँप ऊगलती हैं ; 
साँप : सीढ़ियाँ बोता है.

लेकिन ; --------------- 
वास्तविक जीवन में ----------------
-------यथार्थ के धरातल पर----------
साँप असंख्य हैं ............. सीढियाँ कम
चढना कठिन है........... फिसलना सुगम.

आप चंद सीढियाँ चढ के देखिए ! 
लोग टाँग खींच लेंगे 
साँप निगलें; उससे पहिले ही, 
जबडों में भींच लेंगे 
आप जितना छटपटायेंगे-------- 
गहरा धँसते जायेंगे 
शीर्ष से ठीक पहिले स्वयं को; 
आरम्भ-बिन्दु पर पायेंगे .

हाँ ; लम्बे ' सं..घ...र्ष ' के बाद 
मनुष्य की "विशेष प्रजाति " ने
साँपों की पूँछ पकड कर ; 
ऊपर चढ़ना सीख लिया है
सीढ़ियों को---------- साँपों की; 
बगल में खींच लिया है
अपने मानस को ------------------
अबूझ---ज़हर से सींच लिया है.

अब ; "वे" जब भी सीढियों से फिसलते हैं 
----- साँपों के सहारे ऊपर चढ़ने लगते हैं .

हैरत होती है कि ; ------------------
साँप ! आखिर क्यों मौन हैं ?
हम----आप सभी जानते हैं कि; 
' वे ' कौन हैं ???
***********---------------------***********-* ----------------**************-------------------

ANUPAM.TRIPATHI HINDI POEM SAANP SIDHI SNAKE AND LADDER

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