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तुम
तुम
★★★★★

© Rohit Sharma

Drama Fantasy Romance

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कभी देखता हूँ जब तुम्हें,

सोचता हूँ केवल तुम्हें |


लरजते होठों की खामोशियाँ,

तुम्हें गुनगुनाती हैं,

तन्हा दिल की गहराइयाँ,

तुम्हें बुलाती हैं |


कभी तुम हो जाती हो गुम,

बहुत ढूंढ़ता हूँ मैं तुम्हें,

और हो जाता हूँ गुम,

यादों के वीराने मैं |


वक़्त गुजरता है,

मौसम बदलते हैं,

पर तुम वहीं हो,

मेरी यादों में,

गुलाब की पंखुड़ी-सी,

एक खिलती कली-सी |


अब भी तुम्हें तकता हूँ,

अधखिला चाँद नज़र आता है,

अनछुआ जाम नज़र आता है,

मदहोशियों के आलम में,

तुम्हारा सपना मुझे जगाता है |


तुम्हारी यादों में जागता हूँ,

तुम्हारे सपनों में सोता हूँ,

अब तो हर तरफ़, हर और,

तुम्हारा चेहरा नज़र आता है |

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