Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
एक प्यासा लम्हा रीत गया
एक प्यासा लम्हा रीत गया
★★★★★

© Ankur Govind

Others

1 Minutes   6.9K    1


Content Ranking

चलते -चलते क्यों लगता है, एक अरसा यों ही बीत गया 
लगता है पानी के घट से ,एक प्यासा लम्हा रीत गया 

झड़ते पत्ते यह कहते है, मौसम का हाल बदलता है 
पर रोज़-रोज़ यों लगता है, सूरज तो पीछे चलता है 

तुम गऐ तुम्हारे साथ गया, उस प्यारे बचपन का आँगन
अब फ़ीका -फ़ीका सा, लगता, जीवन का हर कोई बंधन 

तेरे काँधे पर सर रखकर, हाँ कितनी रातें काटी हैं 
सन्नाटों में यह लगता है यह घड़ियाँ हमने बाँटी हैं 

अब नई कोपलें खिलती है,तो सकुचाता है मेरा मन 
आती है कई बहारें भी ,पर ना जाता यह सूनापन 

memories it forms it fades it colours. Eternity is perpetual like love

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..