Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
तरसते हैं  हम
तरसते हैं हम
★★★★★

© Manasvi Poyamkar

Romance

1 Minutes   1.3K    8


Content Ranking

करने दो

फ़िज़ाओं को ज़ालिम सितम

के छुपी हुई रुह से इनामे

बसते हैं हम...

तुम मुसकुरा जो देती हो

फुलों को देख

उन फुलों में हंसते है हम..

आ जाना वक्त रहते दर पे

दीदार करने हमारी चाहत का

आपके बिन हर साँस में तरसते हैं हम..

रूह सितम साँस

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..