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इक और किरीट बसे दुसरी दिसि
इक और किरीट बसे दुसरी दिसि
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© Raskhan Kavya

Classics

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इक और किरीट बसे दुसरी दिसि लागन के गन गाजत री।

मुरली मधुरी धुनि अधिक ओठ पे अधिक नाद से बाजत री।

रसखानि पितंबर एक कंधा पर वघंबर राजत री।

कोड देखड संगम ले बुड़की निकस याह भेख सों छाजत री।

उत्कृष्ट रचना रसखान इक और किरीट बसे दुसरी दिसि

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