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© Hare Prakash Upadhyay

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दोस्त चार हज़ार नौ सौ सतासी थे

पर अकेलापन भी कम न था

वहीं खड़ा था साथ में

दोस्त दूर थे

शायद बहुत दूर थे

ऐसा कि रोने-हँसने पर

अकेलापन ही पूछता था क्या हुआ

दोस्त दूर से हलो, हाय करते थे

बस स्‍माइली भेजते थे....

#hindipoem #hindipoetry #poem #poetry #hindiliterature

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