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 शिकायत
शिकायत
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© Hitanshu Pandey

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मुझे शिकायत है
उस सरकारी फाइल की धूल से
डॉक्टर की एक मामूली भूल से
मिड डे मील के बासी भात से
गुडगाव में कैसी भी बरसात से
मुझे शिकायत है
सुबह शाम के बम्पर टू बम्पर जाम से
Municipality के बेमतलब आराम से
एहसानफरामोश कश्मीर के आवाम से
दिल्ली को डराने वाली उस शाम से
मुझे शिकायत है
राजीव चौक के रेले से
हर साम्प्रदायिक मेले से
केजरीवाल के पलटते बयान से
तारे छिपाए धुंदले आसमान से
मुझे शिकायत है 
महिला आयोग की बड़ी बिंदी से
होर्डिंग पे लिखी गलत हिंदी से
मीटर से ना चलने वाले ऑटो से
वृद्धों का अनादर करने वाले छोटों से
मुझे शिकायत है
जबां से माँ बहन के टुच्चे संवादों से
हवाई नेताओं के झूठे लफ्फाजी वादों से
रातों में मजबूर जिस्म खरीदते शख्स से
आईने मे मुस्कुरा कर मिलते अक्स से
मुझे शिकायत है
सुबह नींद को परेशां करती धूप से
आदम के वहशी हो जाते उस रूप से
गड्डों में सड़के ढूंडती कारों से
दफ्तर से लौटने पे मिली बंद बाजारों से
मुझे शिकायत है
कामवाली बाई के फॉर्मेलिटी वाले टटके से
भूकंप के बेवक्त डराने वाले झटके से
नाख़ून के पास निकल आये मास के टुकड़े से  
कोस्मटिक मोहब्बत की मुस्कान लिए मुखड़े से
मुझे शिकायत है
हनी सिंह के justifications से
अपने खुद के impatience से
राजनीति को व्यवसाय बनाने वालों से
अर्नब गोस्वामी के सरदर्द सवालों से
मुझे शिकायत है
परीक्षा से एक दिन पहले लाइट चले जाने से
साथ लिए बैठे हैं जिसे उस गुजरे ज़माने से
धोनी के आखिरी ओवर तक मैच लड़ाने से
सैनिटेशन के एअरपोर्ट पर सिमट जाने से
मुझे शिकायत है 
मोबाइल की बैटरी के खस्ताहाल से
कलम के ना होते इस्तमाल से
बॉस की रोज बढ़ने वाली expectations से
iphone 6 वाली irresistable temptations से
मुझे शिकायत है
हॉस्पिटल की opd में लगी लम्बी कतारों से
बाबाओं के अध्यात्मिक ज्ञान देते विचारों से
मॉल में निरर्थक घूमती शामों से
कॉर्पोरेट डिनर के दौरां टकराते जामों से
मुझे शिकायत है
फिल्मों की बेहूदा रेटिंग से
एटीएम पे मिलने वाली वेटिंग से
रात भर जगाने वाली बातों से
बेबस कर देने वाले हालातों से
मुझे शिकायत है
बचपन में हो जाने वाली शादियों से
आतंक का आशियाना बनी वादियों से
सिसकियों में भीगे उस आँचल से
प्यासों को तरसाने वाले बादल से
मुझे शिकायत है
सड़क चलते मुसाफिरों पे कीचड़ उडाती कार से
पडोसी के घर से सुनाई देती रोज की तकरार से
irctc के पेज में होने वाले हर बार के इन्तजार से
खबर छुपाये इश्तहारों से भरे उस अख़बार से
मुझे शिकायत है
अपनी चादर से पैर बाहर निकालने से
माँ को याद कर के सो चुके उस पालने से
ट्रैफिक सिग्नल में कांच खटखटाते नन्हे हाथों से
नजरे चुराने को विपरीत दिशा में होती बातों से
मुझे शिकायत है 
खुद को धोखा देने वाले चेहरों से
मुंह खोल के दहेज़ मांगते सहरों से
ट्रैफिक के बीच फंसी एम्बुलेंस से
वयस्कों सी बाते करती इनोसेंस से
मुझे शिकायत है   
तुम्हारे नकली मुस्कुराने से
जानबूझ कर मजाक उड़ाने से
सब कुछ जानते हुए तड़पाने से
सच के दौरान आँख चुराने से
शिकायतों के दौर ख़त्म हो जाने से
भागते हुए इतवार को ना पकड़ पाने से
पांच दिन फिर वोही पैसे कमाने से
उनके खत्म होने पर हताश हो जाने से
मुझे शिकायत है

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