Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
साथ तो दे ना सकी...
साथ तो दे ना सकी...
★★★★★

© Abasaheb Mhaske

Romance

1 Minutes   1.3K    3


Content Ranking

मैं अक्सर सोचता हूँ की... 

आसानी से क्यों नहीं मिलती 

चाहत जिंदगी में ...  

शायद इसलिये कि वो बहुमूल्य है !

जब याद उसकी आती है तो...

अकेले में रोता हूँ अक्सर !

दिन रात सपने उसके...

उसे मिलें भी तो कैसे ?

कौन किसका रक़ीब होता हैं ..

कौन किसका हबीब होता हैं !

बदल जाते हैं नाते- रिश्ते ...

जहाँ जिसका नसीब होता हैं !

माना कि तुम मेरी ना हो सकी..

अब बस तू इतना कर !

साथ तो दे ना सकी.. 

थोड़ा सा दे दे तू जहर ! 

चाहत हबीब ज़िंदगी

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..