Bijjal Maru

Drama


Bijjal Maru

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वो कोई और लोग थे

वो कोई और लोग थे

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जब हँसने का, मुस्कुराने का

वक़्त हुआ करता था

जब मिलने, संग बैठने का,

सुनने का, सुनाने का,

मक़सद नहीं हुआ करता था

वो कोई और लोग थे !


जब नीला दिखाने को असमाँ,

हरा बताने को हरियाली, 

पेड़, साँझे चूलें; हँसी-ठहाके,

समझना, सिखाना,

जीवन की रीत हुआ करती थी

वो कोई और लोग थे !


जब आँखों की मस्ती,

नादान मुस्कुराहट को सुंदरता कहते

जब चेहरे के साफ़ आइने में

दिल साफ़-साफ़ नज़र आते

वो कोई और लोग थे !


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