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ऐतबार
ऐतबार
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© Dilbag Virk

Romance

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क्यों तेरे दिल को मुझ पर ऐतबार आया ही नहीं 

    मैंने पूछा था तुझसे, तूने बताया ही नहीं । 

     

    बिखर गया था आशियाना मेरा देखते-देखते

    न तूने की कोशिश, मैंने भी बचाया ही नहीं ।  

 

    इस दुनिया में जीने के बहाने हैं बहुत मगर

    बहानों के खिलौनों से दिल बहलाया ही नहीं । 

 

    हर वक्त उमड़ता रहा तूफां सीने में मेरे

    तड़पने दिया दिल को, मैंने समझाया ही नहीं ।

 

    हर किसी को क्यों बताएं दर्दे - दिल की दास्तां 

    वो क्या जानेंगे, जिन्होंने जख़्म खाया ही नहीं । 

 

    तेरा प्यार आखिरी था ' विर्क ' मेरी ज़िंदगी में 

    मैंने फिर कभी ख़ुद को आजमाया ही नहीं । 

          

दुनिया प्यार खिलौना

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