Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
ये मैं ही हूँ
ये मैं ही हूँ
★★★★★

© Arti Varma

Others

1 Minutes   7.2K    4


Content Ranking

एक थका माँदा रस्ता 
मेरे हलक़ से होकर गुज़रता है 

आया कहाँ है मालूम नहीं 
पर मिलता है जा कर 
मेरे धड़ के बायीं  ओर बनी 
अँधेरी कोठर में.... 

कोई मुसाफ़िर कोई राहगीर 
नहीं दिखता उस पर चलता हुआ 

पर दो पैर दिखते है 
बनते-मिटते, मिटते-बनते 

आखिर कौन है वो 
जो आईना पहने फिरता है 

हाँ ये मैं ही तो हूँ 
जो ख़ुद से चलकर ख़ुद तक पहुँचता हूँ 

जो ख़ुद से चलकर ख़ुद तक पहुँचता हूँ........

poetry

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..