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“ज़िन्दगी के हँसी मोड़ पर तुम मिले”
“ज़िन्दगी के हँसी मोड़ पर तुम मिले”
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© Vishal Agarwal

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ज़िन्दगी के हँसी मोड़ पर तुम मिले
बस तभी मिट गऐ ज़िन्दगी से गिले
मन में पुष्पों की वर्षा सी होने लगी
खिल उठे पुष्प जो थे अब तक खिले
खिल उठे पुष्प जो थे अब तक खिले
देखकर तेरी जुल्फों की काली घटा
देखकर तेरी जुल्फों की काली घटा
हम बरसने लगे बादलों की तरह
बिन तेरे मैं जियूँ ये तो संभव नहीं 
हँस के मैं मर सकूँ प्राण लो इस तरह

ज़िन्दगी एक समर है हमारे लिऐ
मेरा सबकुछ न्योछावर तुम्हारे लिऐ
सामने हैं खड़े कौरवों की तरह
मेरे अपने हैं सब जो कतारें लिऐ
मेरे अपने हैं सब जो कटारें लिऐ
तुम मेरा साथ दोगी तो जीतूँगा मैं
जीत के आऊँगा पांडवों की तरह
बिन तेरे मैं जियूं ये तो संभव नहीं
हँस के मैं मर सकूँ प्राण लो इस तरह
चल रहा था मगर साथ कोई ना था
मिल रहा था बहुत हाथ कोई ना था
पथ कठिन है बहुत हाथ को थाम लो
मैं तेरे साथ हूँ तुम मेरा साथ दो
संघर्षों की फिसलन भरी राह में
मैं फिसलूँ कहीं थाम लो इस तरह
बिन तेरे मैं जियूं ये तो संभव नहीं
हँस के मैं मर सकूँ प्राण लो इस तरह
तुम मुझे छोड़कर खो गई भीड़ में
मैं भटकता रहा पागलों की तरह
बिन तेरे मैं जियूँ ये तो संभव नहीं
हँस के मैं मर सकूँ प्राण लो इस तरह"

कविता ज़िन्दगी पुष्प

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