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मेरी ज़िन्दगी की मंज़िल
मेरी ज़िन्दगी की मंज़िल
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© Raman Sharma

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मंजिल है तू मेरी ।
चल दूँगा एक दिन पाने ।।
अगर मिले राह में काँटे ।
फूल समझ के कुचल दूँगा मैं ।।
फ़ँस गया कहीं अँधेरे में ।
जुगनू समझ के चल दूँगा मैं ।।
पड़ी राह में नदी या सागर ।
जल जीव समझ के कूद जाऊँगा मैं ।।
भटक गया कहीं जाल मेँ ।
परिंदो से पौधों से पता पूछूँगा मैं ।।
सच्चा आशिक हूँ मैं तेरा ।
कर रहा इतनी कोशिश तुझे पाने में ।।
मंजिल है तू मेरी ।
चल दूँगा एक दिन पाने ।।
चली गई अगर दूर कहीं ।
पीछा नहीं
छोड़ूँगा तुम्हारा मैं ।।
जान लेना ये दिल है ना मेरा ।
इसमें बसा के रखूँगा सदा मैं ।।
मंज़िल है तू मेरी ।
चल दूँगा एक दिन पाने ।।
गौर करना प्रिय मेरे जज़्बातों पर ।
घटिया ना समझना कभी तुम ।।
किया है जो तुमसे सदा ।
सच्चा है वो मेरा प्यार ।।
मंजिल है तू मेरी ।
चल दूँगा एक दिन पाने ।।

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