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  माँ
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© Deepa Joshi

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माँ तू सागर है ममता का और छलकती गागर है प्यार की ।

तू ही मेरी जीवन धारा है और तू ही डोर मेरी पतंग की ।

एक हिस्सा हूँ मैं तेरे अंग का और एक टुकड़ा हूँ तेरे दिल का ।

सोच हूँ तेरे हर ख़याल का और उत्तर हूँ तेरे हर सवाल का ।

मुझ को पा कर तू अपना सब कुछ भूल गई , सिवा मेरे रहा न कुछ तेरा ।

मेरा जीवन सफल बनाने को तेरा हर सपना बन गया मेरा।

सोचती हूँ यदि तू न होती तो क्या मैं ,मैं होती ?

बिन तेरे मैं पहली साँस में ही अपना जीवन खो देती ।

तेरे ऋण से मैं कभी उऋण नहीं हो सकती , मेरी हर साँस में तू समाई है।

तू परमात्मा है मेरे लिऐ और तूने मेरे जीवन में भगवान से बढ़ कर जगह पाई है ।

 

Copyright Deepa Joshi

 

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