Mani Aggarwal

Drama


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प्रेम संग खेलो होली

प्रेम संग खेलो होली

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होली अबके साल की, बरसावे रस धार

पिचकारी भर छोड़िये,मधुरिम प्रेम फुहार

दहन होलिका संग हो, क्रोध, बैर, अभिमान

कोशिश से भी ना जले, सत्य, प्रेम, सम्मान !


प्रेम भाव से लग गले, नेह-रंग बौछार

तन मन हर्षित हों सभी,ऐसा हो त्योहार

हो अपना रूठा कोई, करना नेक विचार

पहल स्वयं कर लीजिये,भर दो पड़ी दरार !


प्रेम थाप ऐसी बजे, थिरके सब नर-नार

हर्ष और उल्लास से, पूरित हो घर द्वार

ऐसा रंग चढ़ाइये, उतरे नहीं उतार

गहरा ही होता रहे, होली में हर बार !


भाईचारे, प्रेम हित, अपने सब त्योहार

बनी रहे ये रीति यो, महके सब संसार।।


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