Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
लौट आओ
लौट आओ
★★★★★

© Anima Das

Others

1 Minutes   13.9K    5


Content Ranking

लौट आओ

अब तलक शामिल है

दर्द के साथ खलिश भी

वह कह गये

इंतेज़ार की खास पल को

गज़ल बना देना

मैं लौट आऊँगा...

 

दिन गुज़रे

बरसों बीते

आईने की चहरे पर

उदासी की परत उभरे

हरा वसंत

नटखट फागुन

मेरे चुनरी से

रंग उड़ा ले गये

उनकी परछाई को

मन की कान्भास पर उतार ने लगी....

 

रोज़ रेशमी रातें

सजधज कर आती है

सहमी आँखों से

नींद चुरा लेती है

वादियों को अँधेरी छाँव

दे जाती है....

 

मैं ग़ज़लों की तारीफ़ करती हूँ

गुनगुनाती हूँ

वह हर लब्ज में

आप ही समा गये

अब इस पत्थर निगाहों में

रौशनी कहाँ

धुँधली तसवीर से

सवाल किये जा रही हूँ.....

 

लौट आओ....

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..