Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
सवाल
सवाल
★★★★★

© Disha Meshram

Tragedy

1 Minutes   6.9K    14


Content Ranking

वो ठहाके लगाते रहे

और पैसा बनता रहा 

हमने खुद को हैरान देखा ,

तो मनाना पड़ा ये कहकर की ..

धारावाहिक हास्य है, चलो ज़रा हँस ले 

पर हैरानी ये थी कि

अंत तक हंसी आयी ही नहीं ..

बस टीवी बंद करके जैसे ही उठी

तो अख़बार में 

ज़ानवारों के लिये ब्यूटी सलून 

और 

इंसानों के लिये वृद्ध आश्रम देख के 

अचानक हंसी, जाने कहाँ से आ गयी ..

ये 

नाटकियता की जीत थी 

या 

इंसानीयत की हार ??

हास्य अख़बार धारावाहिक

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..