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तू एक छेड़ी हुई सी नज्म मेरी
तू एक छेड़ी हुई सी नज्म मेरी
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© Shudhanshu Sharma

Fantasy Inspirational Others

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तू एक छेड़ी हुई सी नज्म मेरी ,
मैं तुझको बांधता एक साज़ हूँ ,
तू धुन है मेरे धड़कनों की,
और मैं तेरी आवाज़ हूँ,
तू है खिलता कमल मैं पंक तेरा ,
तू मेरी रोशनी ,
मैं रंग तेरा ,
तू मेरा साथ हो ,
मैं संग तेरा ,
तू मेरी रूह हो ,
मैं अंग तेरा ,
तू एक बहती हुई सी पंक्ति मेरी ,
मैं तुझमे डूबता एक चाँद हूँ,
अब तू भी मेरे साथ है और मै भी तेरे साथ हूँ,
तू भी मेरी आवाज़ है मैं भी तेरी आवाज़ हूँ , 
तू एक छेड़ी हुई सी नज्म मेरी ||----------

इस कविता में इश्कमजाजी से इश्कहकीकी को जोड़ने की चेष्टा की गयी है

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