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दिन को अच्छा न लगे रात को अच्छा न लगे
दिन को अच्छा न लगे रात को अच्छा न लगे
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© Mahebub Sonaliya

Inspirational

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दिन को अच्छा न लगे रात को अच्छा न लगे
आज भी ग़म  जो किसी का मुझे अपना न लगे
जिंदगी मैं तो तेरे बोझ से झुक जाता हूँ
लोग कहते है मगर मुझको ये सजदा न लगे।
है कोई जो मेरी नज़रों  में छुपा बैठा है
वो जो अपना न लगे और पराया न लगे।
आईने से भी  ग़लतफ़हमी  तो हो सकती है।
मेरे जैसा है मगर ये मेरा चहेरा न लगे।
है कमी कोई या मश्शाक हुआ है महबूब 
इश्क की राह इसे आग का दरिया न लगे।

सजदा ज़िंदगी आईना

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