Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
गुलमोहर
गुलमोहर
★★★★★

© Anima Das

Abstract

1 Minutes   14.2K    5


Content Ranking

माँ ने कहा था 

देर ना करना 

दिन ढले लौट आना 

अचानक बादल घुमड़ता है 

बारिश की छींटे

कपडों में छप जाती है।

ज़माने वाले तो नासमझ है 

सवालों की धुंध जम जाएंगे 

दाग चाहे चाँद में भरी हो 

कहानी चोट भरी बनाएंगे।

 

माँ ने ये भी कहा था 

मैं सब से अलग हूँ 

बचपन की नन्ही गुड़िया हूँ 

भले ही मुझे 

शर्म की चुनरी ओढ़नी पड़े 

पर अब भी मैं 

कली सी मासूम हूँ।

 

मेरी गली के चौराहे पर 

सन्नाटे की पेड़ 

जिसकी टहनी आदमखोर है 

मसले गए हैं 

कई नाजुक फूल गुड़ियों के साथ

मुझे वहाँ से आज गुज़रना हैं।

 

माँ ने कहा तो था 

पर रास्ता लम्बा हैं 

सूरज की परछाई छुप रही है..

गुलमोहर की लाली 

मेरी चूनर से भी गहरी 

चौराहे की उस पार 

मेरे घर की गली।

माँ ने कहा था 

दिन ढले लौट आना।

गुलमोहर सन्नाटा चूनर

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..