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शहर बड़ा मौन है
शहर बड़ा मौन है
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© Pooja Ratnakar

Drama Tragedy

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ये नाम का शहर,

ये प्यार का शहर,

शहर बड़ा मौन है,

शहर बड़ा उदास है ।


मैंने एक बच्चे से पूछा,

क्यों उदास है रे तू ?

कहता मेरी माँ मर गई,

चाँद से जैसे चांदनी उतर गई ।


मेरा घर मस्जिद के पास है,

शहर बड़ा मौन है,

शहर बड़ा उदास है ।


एक बूढ़ी माँ,

चेहरे पर शिकन लिए हुए,

पथराई आँखें,

मानो दिल पर वजन लिए हुए ।


मैंने पूछ डाला,

तू क्यों माँ उदास है,

उत्तर मिला-

मेरे बेटे का लहू मेरे पास है।


शहर बड़ा मौन है,

शहर बड़ा उदास है ।


कुछ पल बात बढ़ी आगे,

मिल गए संकरे रास्ते,

आवाज आई मारो-मारो,

भाग न पाए बचके ।


पूछने लगे क्या तेरा कौम है,

मैं बोली, मैं ना हिंदू, 

ना मुसलमान हूँ,

मैं तो एक इंसान हूँ ।


गुर्रा कर पूछे,

कहाँ तेरी इंसानियत का पास है ?

शहर बड़ा मौन है, 

शहर बड़ा उदास है।

कविता शहर मौन उदास जीवन इंसान हादसा दुःख

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