Sonam Kewat

Abstract


Sonam Kewat

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कोरोना

कोरोना

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आजकल लोगों को इस बात का रोना है कि,

हर जगह फैला एक वायरस कोरोना है।

सोचो आखिर क्या तुम इतने कमजोर हो,

कि छोटा सा वायरस तुम्हें खा जाए।


अरे थोड़ा सा तो प्रयास करो कि,

इसी बहाने तुम्हें थोड़ी अक्ल आ जाए।

मौत की चिता पर लेटने से अच्छा तो,

तुम कुछ दिन अपने घर में बैठे रहो।

जो वक्त मिला है परिवार के साथ,

उनसे अपने दिल की बातें कहो।


बस कुछ सावधानी ही तो बरतनी है,

फिर तुम क्यों परेशान होते हो?

तुम कोई छोटे बच्चे थोड़ी ही हो,

जो घर से बाहर जाने के लिए रोते हो।


देखा है मैंने इन हालातों में भी कही,

धर्म और राजनीति के बातें बनाते हुए।

ये महामारी है सावधान रहना सिखों,

नहीं तो चले जाओगे रोते गाते हुए।


हम लैब में बैठे बीमारियों की जांच करते हैं,

डॉक्टर मुसीबतों में भी आकर इलाज करते हैं।

कुछ नासमझों को घर में बैठाने के लिए,

सोचो पुलिस लाठी चार्ज करते हैं।


यू मजाक ना करो हालातों का,

जिंदगी किसी की मजाक का नाम नहीं।

रो रहा है आज देश सारा,

दर्द को करो ऐसे बदनाम नहीं।


मिलों तो हाथ जोड़ो, मिलना छोड़ो,

घर से अपने तुम निकल ना छोड़ो।

बच कुछ सावधानियों को बरतते हुए,

इस कोरोना का दुनिया से नाता तोड़ो।


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