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अवसर सुनहरा
अवसर सुनहरा
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© Hasmukh Amathalal

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समान्तयः कुछ बदलाव ज़रूरी है

मौसम हमारा प्रहरी है

उसको हर वक्त की जानकारी है

समय समय पर दिखाता "अजुबा अलगारी" है। अवसर सुनहरा

 

हमारा मन में कुछ अलग से भाव आते है

नदी का बहाव भी नए सिरे से होता है

उसकी फितरत एकदम शांत हो जाती है

मानो धीरे से कान में कुछ कहने को आती है। अवसर सुनहरा

 

फुलो में  बेचैनी सी है

टनखियों में जैसे नयी चेतना जग रही है

कुछ और फूल बाहर आने की  फ़िराक में है

बसंत का आगमन अचानक सा लगता है। अवसर सुनहरा

 

ये सब उपरवाले की मेहरबानी है

हमारा आनंद भी बस जज़्बाती है

तो क्या हुआ? ये सब सब तो कुदरती है?

हम अपनी पीठ थपथपाते है ओर कहते है ‘इंसान तो मेहनती ही है!’ अवसर सुनहरा

 

अंदरूनी डर  भी सताता है

ज़िंदगी ख़त्म होने का डर सिहरन लाता है 

पानखर का दस्तक देना एक और चीज़ का इशारा है

मौसम का बदलना ही अवसर सुनहरा है। अवसर सुनहरा

 

अवसर सुनहरा

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