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है क्या गुनाह मेरा
है क्या गुनाह मेरा
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© Dilbag Virk

Tragedy

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किस बात की दे रहा सज़ा मुझे 

है क्या गुनाह मेरा, बता मुझे । 

 

हिम्मत नहीं अब और सहने की 

रुक भी जा, ऐ दर्द न सता मुझे । 

 

या ख़ुदा ! अदना-सा इंसान हूँ 

टूट जाऊँगा न आजमा मुझे । 

 

क्यों चुप रहा उसकी तौहीन देखकर 

ये पूछती है मेरी वफ़ा मुझे । 

 

आखिर ये बेनूरी तो छटे 

किन्हीं बहानों से बहला मुझे । 

 

एक अनजाना - सा खौफ हावी है 

अब क्या कहूँ ' विर्क ' हुआ क्या मुझे । 

 

हिम्मत इंसान गुनाह ख़ौफ़

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