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प्यार सबकुछ नहीं ज़िंदगी के लिए
प्यार सबकुछ नहीं ज़िंदगी के लिए
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© Naayika Naayika

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ऑफिस की पार्किंग पर खड़े होकर कहता रहा मुझसे........
समय हो तो सब कुछ है
वर्ना किसे फुर्सत है कि सोचे
कि कभी प्यार भी हुआ करता था इन आँखों में
अब तो सिर्फ चश्मा चढ़ा रहता है
और उँगलियाँ की-बोर्ड पर अटकी रहती है...

हाँ कभी कम्प्यूटर हैंग हो जाता है
तो याद आ जाती है वो सरसराहट
जो उँगलियों के पोरों में हुआ करती थी
जब तेरी ज़ुल्फों को छू जाती थी

हर बार की तरह आज भी झाँककर देखता हूँ
उस कुर्सी को जहाँ अक्सर 
तुम्हारा दुपट्टा अटक जाता था
और तुम गुस्से में निकल जाती थी

फिर खड़ी रहती थी पार्किंग पर
किसी के इंतज़ार का बहाना बनाकर
मेरी गाड़ी पर अपना पर्स टिकाए
जैसे आज खड़ी हो अपने बच्चों को लेकर
किसी के इंतज़ार में....

चंद साल का ही तो सफर तय किया है
फिर भी लगता है
बरसों हो गए इस पार्किंग पर खड़े हुए
वो नहीं आया जिसका तुम इंतज़ार करती रही
और मैं कहता रहा हर बार
समय हो तो सब कुछ है....
तब कॅरियर था, प्रोजेक्ट्स थे,
समय नहीं था ............

आज तुम हो, मैं हूँ
और हाँ याद आया 10 मीनिट बाद मीटिंग है...........

Nayiak Ma Jivan Shaifaly Poem

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