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मेरी रूह
मेरी रूह
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© Aman Alok

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मेरे जिस्म से,

अपनी हवस कि प्यास बुझाते हो

मुझे अपने घर के बाहर ही इस्तेमाल कर जाते हो

मेरी मजबूरी का तुम फायदा उठाते हो !


यह सब मैं सहन कर सकती हूँ

लेकिन तुम मेरे रूह को बदनाम ना करो

मुझे तुम वेश्या का नाम ना दो

यह सब मैं सहन नहीं कर सकती साहब !


मेरी भी कुछ मजबूरी थी

दर - दर की मारी फिरी थी

आखिरी रास्ता यही खुला था आकर

समाज की ना जाने कितने ठोकरों को खाकर !


क्या करती साहब घर की कुछ मज़बूरी थी

भाई - बहन के पेट की भूख अधूरी थी

इसीलिए जिस्म का सौदा करना पड़ा

यहाँ पर जाकर !


घर की मजबूरी को देख

और पैसो को यहाँ पाकर

मैं एक बाज़ारू कहलाने लगी

खुद की मजबूरी को सामने पाने लगी

अपने जिस्म को ऐसे ही दिखाने लगी

क्योंकि बच्चों के पेट भूखे थे साहब

उनके भूख को मिटाने के लिए

अपनी जिस्म का सौदा करने लगी !


मेरे भी कुछ अरमान थे

जो दिल में पाल कर रखे थे

मैंने बचपन में उन सपनों को

अपने इस दिल वाली आँख से देखा था

पर उस समय क्या पता था मुझे साहब

की गरीबी मेरी मजबूरी बन जाएगी !


मुझे मेरे जिस्म का सौदा करने के लिए

यहाँ पर इस कदर लाएगी

दिन - रात ना जाने कितने भेड़िये आते हैं

मेरे जिस्म से अपनी प्यास बुझाते हैं

बार - बार वो मेरे जिस्म पर

अपनी हवस की बरसात कर जाते हैं !


ना जाने वो अपनी भूख से

मेरे दिल को कितनी बार छलनी कर जाते हैं

पर यह करना पड़ता है साहब

क्योंकि मेरे घर की कुछ मजबूरी थी !


मैं अपने परिवार में सबसे बड़ी थी

माँ - बाप का साया बचपन में ही चला गया

छोटे भाई - बहन का पेट भूख से रोज़ जलता गया

उनके पेट भरने के लिए कुछ करना ज़रूरी - सा पड़ गया

लेकिन कोई अच्छा काम ना मिला मुझे

इसीलिए यह जिस्म का सौदा करना

मेरी मजबूरी - सा बन गया !


चाहत तो मेरी भी थी

सपने तो मेरे भी थे

लेकिन घर की ज़िम्मेदारी ने

मेरे सपने को दिल में ही मार देने

की इजाज़त दे डाली !


उन ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के लिए

इस वेश्या की चादर को मैंने खुद पर उड़ेल डाला

क्या करती साहब़ मेरी भी कुछ मजबूरी थी

बच्चों का पेट पालना मेरी कमज़ोरी थी !


पर मुझे यह वेश्या शब्द अंदर ही अंदर खाये जाता है

जब भी कोई मेरे सामने यह वेश्या शब्द इस्तेमाल कर जाता है !


भगवान के लिए मुझे ऐसा ना बोलो साहब

चाहे अपनी प्यास बुझाने के लिए मेरी जान ले लो साहब

लेकिन मुझपर यह वेश्या शब्द इस्तेमाल ना करो साहब !

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