Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
मौसम तुम आवारा हो
मौसम तुम आवारा हो
★★★★★

© Indraj Pushpa

Drama

1 Minutes   7.0K    3


Content Ranking

तुझे पाने को विचलित मैं

जब भी अविराम चला हूं

पथ की कठिनाईयों में भी बढ़ा

जग की बेरुखी से भी लडा

नहीं ठहरूंगा तुमसे डरकर

मौसम तुम आवारा हो।


घनघोर बारिश में मैं भीगा

जेठ की दोपहरी में भी तपा

गर्मी से व्याकुल सा मैं

सुनहरे रेगिस्तान में भी चला

नहीं ठहरूंगा तुमसे डरकर

मौसम तुम आवारा हो।


कहीं उपहास का पात्र बना

कहीं गिर कर भी मैं उठा

क्या हुआ सभी ने साथ छोड़ा तो

उसको पाने को मैं अकेला ही चला

नहीं ठहरूंगा तुमसे डरकर

मौसम तुम आवारा हो।



पसीने से तरबतर नंगे बदन

खेतों में जूझते किसान को देखा

हाथों में छाले लिए उस

बेहाल मजदूर को भी देखा

नहीं ठहरूंगा तुमसे डरकर

मौसम तुम आवारा हो।


अपने अधिकारों के लिए

आधी आबादी को खड़े देखा

देश में अमन शांति के लिए

साम्प्रदायिकता से लड़ते देखा

नहीं ठहरूंगा तुमसे डरकर

मौसम तुम आवारा हो।


जाति मजहब के नाम पर

प्यार का गला घुटते देखा

उस बच्चे की आंखों में

कुछ बनने का सपना देखा

नहीं ठहरूंगा तुमसे डरकर

मौसम तुम आवारा हो।


Seasons Problems Life Journey

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..