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श्रद्धांजलि
श्रद्धांजलि
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© Ravi Shanker

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हे महामानव, आपका महाप्रयाण  देश स्तब्ध विश्व स्तब्ध । प्रारब्ध है मिट्टी का मिट्टी में विलीनता  भूमि पवित्र हो गई था आपका प्रारब्ध  पर विश्व स्तब्ध ज्ञानपुंज देश को बना गए शक्तिपुंज अनुपलब्ध को बना दिया देश को सर्वोपलब्ध विलक्षण का महाप्रयाण उपलब्ध भी स्तब्ध । प्रारब्ध भी स्तब्ध । श्रद्धांजलि करबद्ध ।

कलाम साहब निर्विवाद रूप से महान विचारक थे। उनके जीवन का प्रत्येक क्षण भारतवर्ष के उत्थान को समर्पित था। उनके कई विचारों ने मूर्त रूप धारण किया और कई विचारों का धरा पर अवतार हमारी कर्मठता पर निर्भर है। ज्ञानपुञ्ज को सादर प्रणाम।

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