Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
समंदर हो जाती हूँ
समंदर हो जाती हूँ
★★★★★

© Pravesh Soni

Others

1 Minutes   6.7K    6


Content Ranking

समंदर हो जाती हूँ
~~~~~~~~~~~~~~
तुम मदमस्त होकर 
मचलते हो
अहं से उफनते हो,
सोचते हो ........
समाना है मुझे 
तुम्ही में 
मैं!!!

समझती हूँ तुम्हारी
आकुलता,
जानती हूँ नीर से भरे हो 
पर कितने प्यासे हो तुम
तुम असयंत से 
व्याकुल होकर 
तोड़ देते हो तट 
पर नहीं आ पाते
पास मेरे.....,

मैं ही आती हूँ
कठिन राहोंं ,पर्वतोंं को 
लाँघकर .....
अडिग शिलायेंं खंड खंड 
हो जाती है
वेग से मेरे 
साथ बह कर 
बन जाते है शालिगराम
म्रदु जल लेकर आती हूँ
बुझाने तुम्हारी प्यास ,
प्रीत ही  तो है यह मेरी 
समर्पण है  तुम्हारे लिऐ

चलती हूँ धारा बन 
कहाँ से कहाँ तक ....
विलुप्त हो जाती हूँ
मिलकर तुमसे 
अस्तित्व मिटा कर अपना 
दरिया से मैं समंदर हो जाती हूँ ।

समंदर हो जाती हूँ

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..