Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
स्थान
स्थान
★★★★★

© Kunal Kushwah

Others

1 Minutes   6.9K    0


Content Ranking

कमल की मंद मुस्कान देखता हूँ , अमल की छंद थकान देखता हूँ ,

 प्रभात किरण की लाली में बैठे, तेरे होठों पे स्थान देखता हूँ ।

 स्वहृदय वीरान देखता हूँ ,प्रार्थना की नींव पे मकान देखता हूँ,

ज्ञात अज्ञात के खेल में बैठे, तेरे हृदय में स्थान देखता हूँ ।

 प्रेम की आशा के सौपान देखता हूँ,तेरा हो कर अब तो निर्वाण देखता हूँ,

ख्यात ईश्वर के समीप बैठे, तेरे विचारों में स्थान देखता हूँ ।

तेरी नज़र में बढ़ता रूझान देखता हूँ,ख़ुद का दैविक निर्माण देखता हूँ,

हामि की प्रतीक्षा में बैठे, तेरे जीवन में स्थान देखता हूँ ।

मेरी रगों में नव प्राण देखता हूँ, तेरी साँसों में अपनी जान देखता हूँ,

सूर्योदय कि छाँव में बैठे, तेरे दिनों में स्थान देखता हूँ ।

स्थान कमल मुस्कान होठ हृदय प्रेम निर्वाण नज़र जीवन जान सूर्योदय

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..