Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
सहेलियां कहती है
सहेलियां कहती है
★★★★★

© Hasmukh Amathalal

Comedy

1 Minutes   1.5K    11


Content Ranking

मिली है जिंदगी जिनके लिए

हम आहें भरते थे जिनके लिए

आज सुनहरा दिन लग रहा

मेरा जिस्म पूरा अलग से दिख रहा।

 

कभी नहीं सोचा था

अभी अभी ही आंसू पोछा था

मन  उधेड़बुन में था कि अब क्या करें?

किसको पूछे और किसको कहें।

 

विश्वास नहीं हो रहा

ओर बिन बादल बारिश पर भरोसा!

हरगिज़ नहीं कर सकती

फिर भी जीने को कैसे मना कर सकती?

 

मिल ही गयी है तो इनकार नहीं

जीऊंगी तो भी सरोकार नहीं

आ जाते हैं बार बार सामने यहीं

मजबूर कर देते हैं कुछ कहने यहीं।

 

कोशिश करुँगी दिल को मनाने को

हाँ भी कर दूंगी आने को

पर ज्यादती मत करना सब के बीच

मैं नहीं आउंगी समंदर के बीच बिना सोच

 

कोई नहीं पूछता ये है प्यास कैसी?

दिल  क्यों दिखाता है उदासी?

मैं बार बार लाती हूँ हंसी

सहेलियां कहती हैं  तू तो फंसी

 

सहेलियां हंसी

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..