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मैं एक स्त्री हूँ
मैं एक स्त्री हूँ
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© Anita Lalit

Inspirational

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भावनाओं में सिमटी

भावनाओं से लिपटी

भावनाओं की गीली मिट्टी से

गुँधी हुई हूँ !

भावनाओं में ही

बसती हूँ, बहती हूँ

जीती हूँ, मरती हूँ

बनती हूँ, बिखरती हूँ

भीगती हूँ, सूखती हूँ !

कभी भीगने की आस में

सूखती जाती हूँ

कभी सूखने की आस में

सीलती जाती हूँ !

भावनाओं की नमी ने ही

जोड़ रखा है मुझे

तुमसे, अपने आप से

हरेक शय से !

भावनाएँ न हों

तो तुम कौन और मैं कौन ?

तुम कहते हो

मैं पागल हूँ !

मैं कहती हूँ

मैं एक स्त्री हूँ !!!

भावना नमी पागल

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