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जुगनू
जुगनू
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© Sonam Kewat

Drama Abstract Others

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ऐ बन्दे!

सीख ले तू जुगनू कैसे चमकते हैं
माना जिदंगी में हो अंधियारा,
छूटने लगे जब तेरा संघर्ष यारा
वो अकेले पथ पर निकलते हैं,
सीख ले तू भी जुगनू कैसे चमकते हैं 
देखकर सितारों का उजाला,
जुगनू ने भी प्रकाश फैलाया
कहा तेरे मोहताज तो कई बनते हैं,
हम जुगनू ऐसे ही चमकते हैं
रातो में जब गहरा सन्नाटा हुआ,
देखा भटका पथिक कहीं जाता हुआ 
जाने वो किसके डर से डरते हैं,
देखले इंसान जगुनू ऐसे चमकते हैं
धीरे-धीरे रात गुजर रही है,
सूरज ने कहा मुझ में हुनर कई है
फिर जुगनू अपने घर को चलते हैं,
हम जुगनू ऐसे ही चमकते हैं 
अब ना डर तू भी चलता रह,
सबेरा आएगा प्रयास करता रह 
क्यों बूंद-बूंद से घड़े भरते हैं,
जुगनू ऐसे ही चमकते हैं।

 

जुगनू सीख इन्सान प्रयास संघर्ष ।

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