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कहाँ हूँ मैं..
कहाँ हूँ मैं..
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© Sana K S

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प्रणयम(मुहब्बत) अपनी जिंदगी लूटाकर शर्म ना महसूस हो ऐसे बेशर्म लोगों के गाँव में हैं मेरा प्रणयम..... .

हृदयम(मन) ह्रदय होने का दिखावा करे, पर दया की जहाँ भावना भी ना हो, वो हैं हृदयम..... .

कपटम(धोखा) खुदा भी अंजान हैं, शायद ऐसे बहुत सी बातों वाले दो-मुखी लोगों का नकाब हैं कपटम...... .

नडनम(नाटक) रिश्तों को खो देने के ड़र से, माता-पिता, बच्चे जिंदगी के रंगमंच पर रच रहे ,वो हैं नडनम..... . सहनम(सहनशीलता) रोती हुई तेरी आँखों में देख अपने आँसू में छुपाकर तेरी कहानी को सुनना,क्या महसूस कर सके तुम मेरी सहनशीलता..... .

भवनम(घर परिवार) जहाँ भय-भक्ति, इज्जत, स्नेह देकर पत्नी को ना अपना सके, वहाँ फिर सिर्फ ड़रावना सा वन सा महसूस होता वो हैं भवनम....... .

विफलम(हार) विज्ञान के झाँसे के लालच में, किसी के भी बातों पर यक़ीन कर झूठ खरीद लेने को निकलना वो हैं विफलम..... . पथनम(नाश) नवीनता का एहसास मन में लेकर भी, औरों को जो ना कुछ दे सके, वही पर हैं समझ लेना पथनम...... .

विजयम(जीत) विद्यमान होकर ही बहुत कुछ पा लेने का विश्वास ही हैं विजयम...... . विनयम(क्षमा) विजय क्या हैं, समझने के बाद जो अनगिनत पुप्षों का अंजाने में खिल उठना, वो हैं विनयम....... . ज्वलनम(नफरत) अंदर ही अंदर घुटकर जलते रहना ही हैं ज्वलनम...... . मरणम(मौत) दो दिन में दुख और आँसू ख़त्म हो जाने के बाद, मेरे अपने ही ख़ुद मुझे भूल जाए वो हैं मेरे लिए मरणम.......‪ #‎सना

समझने के लिए बहुत कुछ हैं पर कोई समझना नहीं चाहता.....

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