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स्नेह की तार
स्नेह की तार
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© Lalit Mandora

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कहते है न
नेटवर्क की प्रॉब्लम हो
आंधी में वायर टूट गया हो
तो उसके जुड़ने का इन्तजार करते है
उसके बाद आप की वायर जुड़ जाती है
स्नेह की चक्की में पिसा आटा बहुत उम्दा 
बहुत स्वादिस्ट बनता है
जिसका जायका लंबे समय तक
हमारी स्मृति में बना रहता है
दूरियां नजदीकी का प्रमाण होती है
मैंने इसे दूरी कभी माना ही नहीं
जब कह दिया
कि मेरी प्राण वायु हो तुम
किसी संजीवनी बूटी से कम भी नहीं
एक एहसास भर है
जो इस रगों में बह रहा है
केवल प्रेम
केवल प्रेम के अतिरिक्त कुछ भी नहीं
नहीं पता की इस शब्द का नाम प्रेम है
यह शब्द किसने ईजाद किया
मेरे लिए कोई मेटर नहीं करता
पर तुम्हारे मेरे बीच किसी स्नेह की वायर है
जो बड़ी मजबूत है
इतना सुनते ही
एक बार फिर बारिश होने होने लगी
झमा झम्म
हमारी मस्ती आँखों से होती हुई
देह पर फिसलने लगी
असली विमर्श आज हुआ
जिसका परिणाम संतोषजनक रहा
बारिश अभी भी बाहर थी
जिसमें हम अभी तक भींगे हुए थे
इसका भी एक जायका है
जो आज अरसे बाद लिया
यह केवल स्नेह भर था
या इससे आगे की कोई परिचर्चा
या निष्कर्ष
डजन्त मेटर
अपना निर्णय था
जो लिया
बालिग निर्णय।

#स्नेह की तार #poem

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