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न जाने क्यों तेरी याद आई
न जाने क्यों तेरी याद आई
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© Kafil Ahmad

Romance

1 Minutes   13.8K    1


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फूलों की खुशबू ये चिड़ियों की सरगम

ये नदियां ये सावन महकता ये चिलमन

एक भंवरे को देख कली मुस्कुराई

न जाने क्यों तेरी याद आई...

 

ये झरने का पानी ये कविता पुरानी

हो जैसे मुहब्बत में मीरा दीवानी

कड़ी धूप में जब बदली-सी छाई

न जाने क्यों तेरी याद आई...

 

ये नगमे ये गाने दिलो के तराने

यूं मिलना मिलाना यूं हीं मुस्कुराना

भरी महफ़िल में भी थी तन्हाई

न जाने क्यों तेरी याद आई...

 

ये उजड़ी हुई एक वीरान बस्ती

ये सूखा ये पतझड़ ये कागज़ की कश्ती

तेरे ज़िक्र से हरसू हरियाली छाई

न जाने क्यों तेरी याद आई

यादें

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