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आषाढ़ की रिमझिम बारिश में
आषाढ़ की रिमझिम बारिश में
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© Atul Balaghati

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आषाढ़ की रिमझिम बारिश में किसान खेत में नाँगर हाके
बैठ डाल पर चातक पंछी स्वाति की पहली बूँद ताके
बादल गरजे, बिजली कड़के बच्चे टूटी छत से झाँके
घोर अंधेरा घबराऐ सब छुप गये आँचल में माँ के

चुहता पानी चूल्हे पर जब आग जलाती है बुढ़िया
भीगी लकड़ी, खत्म हो गई माचिस की सारी कड़िया
बच्चे भूख से बिलख-बिलख के जाके माँ से लिपट गये
रोते-रोते सिसक-सिसक के एक कोने में सिमट गये

टूटी खटिया, गीली कथड़ी बना हाथ का सिरहाना
घटा घुमड़ते चिन्ताओं के नींद किसे है अब आना
एक डर और समाया कच्ची दीवार का गिर जाना
किस कर्म का फल है ये या है रब का ताना बाना

क्या समझूँ क्या समझाऊँ मैं आँसू घूँट-घूँट पीना है
आषाढ़ की रिमझिम बारिश में बस राम भरोसे जीना है

 

अतुल

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